आज हम अपने शरीर से जुडी तीन चीजों कि चर्चा करेंगे, जिसको ऋषियों ने एनेशारिरिय कहा है| हमारा जो शारीर है वह भोजन से निर्मित होता है, जैसे हमारी हड्डियाँ, खून, मॉस इत्यादि ये भोजन से ही निर्मित होती हैं| यानि कि जो हमारी प्रणालियाँ हैं, हमरी बोदी के अन्दर जो प्रोसेस है उनका सम्बन्ध हमारे हर सेल से है, हमारी बॉडी में करीब 26 ख़राब सेल हैं और 26 ख़राब सेल से ऊपर हमारा चित्त है| इसलिए आज विज्ञान ने खोजा है कि हर किसी सेल को हम लेलें तो उसका हुबहू एक क्लोन बनाया जा सकता है| इसलिए उन सेलों का जो सिस्टम है उन प्रणालियों में बंधा हुआ है| इसके लिए हमें भोजन की आवश्यकता पड़ती है तो इसपर भी चर्चाएँ होती रहती हैं कि हमारा भोजन कैसा हो? और आज भी खोजबीन जारी है कि हमारा भोजन कैसा हो? मैं इस बात पर चर्चा जरुरी नहीं समझता लेकिन एक बात बहुत महत्वपूर्ण है अभीतक खोजबीन में आया है कि जो मासाहारी होते हैं उनकी आंतें छोई होती हैं और जो शाकाहारी होते हैं उनकी आंतें बड़ी होती हैं| ये जो तथ्य वैज्ञानिकों ने दिए हैं उससे यही निकलकर आया है कि मनुष्य का भोजन शाकाहारी है| मैं यह भी कहता हूँ कि आप जो कुछ भी खा रहे हैं बस इतना ध्यान रखें! आपको जितनी भूख है उससे कम खाएं| अब इससे क्या होगा? जितनी भूख है उससे कम खायेंगे तो जो हमारे शारीर में वायु घुमती है उसको स्पेस कि आवश्यकता होती है, अगर हम अधिक खायेंगे तो वायु घूम नहीं पाती, और हमें दिक्कत और परेशानी को झेलना पड़ता है| जो प्रश्न था कि भोजन हमारा कैसा हो उसका उत्तर है जितनी भूख है उसे कम खाएं|
अब दूसरी बात हमारे ऋषि मुनि सदियों से चिल्लाते आये हैं कि भोजन कब करना चाहिए उन्होंने बताया है जब सूर्य उदय होता है उसके बाद और सूर्य छिपता है उससे पहले भोजन करलें लेकिन व्यस्त जीवन हो गया सिस्टम बिगड़ गया कहीं जॉब, कहीं बिजनिस, कहीं कुछ और हम जो हमारा पकृति का हिस्सा था उस समय से दूर होते चले गए, अब वह हमसे छुट गया है| लेकिन आज जो वैज्ञानिकों की खोज आई है वही रिपोर्ट हमारे ऋषियों ने बहुत पहले ही खोज लिया था| उन्होंने पाया कि हमारी एक जठराग्नि होती है वहां भोजन जाकर पचता है और आपने देखा भी होगा जैसे ही रात होती है तो पेड़ की पत्तियां बंद सी हो जाती हैं और हम कहते हैं कि पेड़ सो गया और जैसे ही सूर्य उगता है वेसे ही पत्तियां खुल जाती हैं| इसे ही हमारी जठराग्नि का हिस्सा है सूर्य के उदय होने पर खुल जाती है, और सूर्य के अस्त होने पर बंद हो जाती है, और बंद होने पर खाने के पचने में बहुत समय लगता है} यानि कि उसी अस्त्व्यस्त समय के कारण हमारा शारीर स्वस्थ नहीं रह पाता| और मैं कहता हूँ कि चलो इतना जल्दी नहीं तो सायं को 7-8 बजे तक करलें जहाँ तक पोसेबिल हो भोजन को देर रात में ना करें|
अब तीसरी बात जो बहुत महत्वपूर्ण है आपने छोटे बच्चे को देखा होगा जो घुटनों भी नहीं चला पता, वह लेटा लेटा हाथ पेरों को चलाता रहता है, इसका मतलब लेटे लेटे हमारा शरीर क्या मांगता है? मतलब छोटा सा बच्चा भी लेटे लेटे एक्सरसाइज़ कर रहा है और जैसे ही वह सोता है ध्यान देना! जब वह सो जाता है वह लम्बी गहरी स्वांसों को लेता है| इसलिए सबसे महत्वपूर्ण बात कि तीनों चीजें हमारी अस्तव्यस्त होगई| ना हम समय पर एक्सरसाइज कर पाते हैं, ना हम स्वांस जो हमारी होनी चाहिए वह हो पाती है| जहाँ तक हमारी स्वांस पहुंचनी चाहिए वहां तक नहीं पहुँच पाती| मित्रो आपने सुना होगा दिल्ली कि रिपोर्ट आई थी कि हमारे फेफड़े प्रदुषण के कारण ख़राब हो गए है, मैं कहता हूँ कि वो कारण तो ठीक है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कारण क्या है कि हमारे भीतर फेफड़ों तक स्वांस जानी चाहिए हमारे फेफड़ों में 6000 छिद्र हैं, फेफड़ों तक हमारी पूरी आक्सीजन जाएगी कैसे? स्वांस हमारी छोटी हो गई इस वजह से हमारी आक्सीजन फेफड़ों तक नहीं पहुँच पाती वह 1500 से 2000 छिद्रों तक ही पहुँच पाती है और हमारे बाकि के छिद्र बंद हो गए हैं| केवल कारण कितना है कि हम लम्बी गहरी स्वांस खुली हवा में लेलें तो उसे भरपूर आक्सीजन हमारे फेफड़ों तक पहुंचेगी|
हमारे शरीर की जो क्रिया है शारीर का जो महत्व है, शरीर का जो सम्बन्ध है उसके लिए ये तीनो चीजें महत्वपूर्ण हैं इसलिए शरीर के स्वास्थ्य की जागरूकता के लिए पूरा का पूरा विश्व लगा हुआ है लेकिन में कहता हूँ कि इन तीनों चीजों से आपका गहरा सम्बन्ध हो जाये तो हम शरीर से स्वस्थ हो सकेंगें|
|| ओम आनंदम ||

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