"आनंदमय जीवन धारा" समय-समय पर ध्यान योग के माध्यम से मानव जन जागरण के सन्देश भेजती रहती है| अतीत से ही हमारे ऋषि, मुनि, संत, पैगम्बर व अवतारी पुरुषों का सन्देश ध्यान योग से ही रहा है| आज के आधुनिक युग में बहुत सी संस्थाएं ध्यान योग के प्रचार में लगी हुई हैं, इसी कड़ी में "आनंदमय जीवन धारा" आध्यात्मिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए कार्य कर रही है| आज के आधुनिक युग में बहुत से मित्र हो सकता है कि ऋषि मुनियों पर ज्यादा विश्वास ना करते हों, परन्तु विज्ञान पर उनका विश्वास है| आज वैज्ञानिकों ने बहुत खोजबीन के बाद पाया कि 90% जटिल बीमारी जो शरीर को लगती है, उनका सम्बन्ध मन से होता है| इसलिए आज बड़े-बड़े हॉस्पिटल में अलग से मेडिटेशन रूम बनाये जा रहे है इसका मतलब अध्यात्म और विज्ञान दोनों का सन्देश ध्यान योग की ओर है| इन सभी को ध्यान में रखते हुए "आनंदमय जीवन धारा" ध्यान योग शिविरों के माध्यम से ध्यान सेवा कार्य जन-जन तक पहुचने के प्रयास में निरंतर लगी हुई है| जिससे हर मनुष्य परमात्मा की दिव्य अनूठी भेंट "सुख-शांति, प्रेम, मैत्री और आनंद" से फलित हो सके|
|| ओम आनदम ||
संस्था का उद्देश्य है कि पूरे विश्व में आनंद की वर्षा हो, और सभी मनुष्य उस वर्षा में स्नान करते रहें| संस्था संथापक युगल दंपत्ति परम आनंद मैत्रेय एवं परम माँ भावना जी को जब बुद्धत्व की घटना घटी जब वे परम आनंद से फलित हुए, तब उन्हें बस यही लगा कि पूरा विश्व इस आनंद से फलित हो| और इसी उद्देश्य से संस्था की स्थापना की गई| मैत्रेय जी ने सन्देश दिया कि मैं तुम सबको आनंद के रूप में देखना चाहता हूँ! विश्व को आनंद की जरुरत है! जब तक मनुष्य आनंद के सागर को ना पा लेगा, तब तक पृथ्वी गृह पर हो रहे युद्ध नहीं रुक सकते| और ये तभी संभव है जब मनुष्य आनंद को उपलब्ध हो| तो आयें चलें उस आनद में जो तुम्हारे पास है, तुम्हारे पास ही वो आनंद की धारा है जो सतत बह रही है| बस उस स्रोत को जानना है| और जानना स्वयं में डूब कर ही होता है| तो आयें और आनंद में स्वयं डूबें और इस आनद को पूरे विश्व में फैलाएं, जिससे सम्पूर्ण पृथ्वी पर हो आनंद , आनंद और आनंद!
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आज हम क्रोध के विषय पर बात करेंगे तो ज्यादा समय ना लेते हुए विषय पर आते हैं| सबसे पहले हम पुराने जो बहुत पहले जो इतिहा...
एक समय गौतम बुद्ध अपने शिष्यों के साथ एक पहाड़ी इलाके में ठहरे हुए थे। शाम का समय था महत्मा बुद्ध अपने एक शिष्य के स...
आनंदमय जीवन धारा ध्यान योग आश्रम झुंडपुर सोनीपत में जो ध्यान का आनंद मिलता है वह और कहीं नहीं| स्वामी जी व माँ जी को ओम आनंदम|.
आनंदमय जीवन धारा में आकर कोई प्रश्न ही ना रहा, जो अनुभव मेने किया उससे मेरा जीवन परम जीवन बन गया| स्वामीजी व माँ जी की करुना सभी पर होती रहे ओम आनंदम |.